उत्तराखंड एकलपीठ ने वेतन के पुनर्निर्धारण के शासनादेश को नियम विरुद्ध मानते हुए स्टाफ नर्सों के वेतन रिकवरी पर लगाई रोक,,,,,

नैनीताल: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत और सेवानिवृत्त स्टाफ नर्सों के वेतन का सरकार द्वारा पुनर्निर्धारण कर उनको पूर्व में दिए गए उच्चीकृत वेतन की रिकवरी करने के शासनादेश को चुनौती देती याचिकाओं पर सुनवाई की।
वरिष्ठ न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने वेतन के पुनर्निर्धारण के शासनादेश को नियम विरुद्ध मानते हुए उसपर रोक लगा दी है।
खंडपीठ ने पूर्व में दिए उच्चीकृत वेतन की रिकवरी छः माह के भीतर उन्हें वापस देने को कहा है। न्यायालय ने सरकार से यह भी कहा कि अगर वेतन पुनर्निर्धारण से सम्बंधित कुछ बचा है तो उसे तीन माह के भीतर निस्तारित करें।
मामले के अनुसार स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत और सेवानिवृत्त स्टाफ नर्स सुनीता सिंह व अन्य ने उच्च न्यायलय में याचिका दायर कर कहा कि उनकी नियुक्ति सवास्थ्य विभाग में स्टाफ नर्स के तौर पर हुई थी।
नियुक्ति के समय उनका वेतन पांच हजार से आठ हजार के बीच निर्धारित था। वर्ष 2011 में राज्य सरकार ने एक शासनादेश जारी कर उन्हें उच्चीकृत वेतन दिया। उसके बाद सरकार ने एक और जिओ निकालकर उनके वेतन का पुनर निर्धारण कर दिया।
अब सरकार इस जिओ के अनुसार उनसे पूर्व में दिए गए उच्चीकृत वेतन की रिकवरी कर रही है, इसलिए इसपर रोक लगाई जाय। याचिकाओ में यह भी कहा गया है कि पूर्ण में निर्धारित वेतनमान सही था उसी के अनुरूप वेतन दिया जाय ना कि पुनर्निर्धारण वाले जिओ के अनुसार।

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