August 11, 2026

उत्तराखंड की संवेदनशील हिम झीलों पर बढ़ता खतरा: वसुंधरा झील में 11 महीने बाद भी नहीं लगा अर्ली वार्निंग सिस्टम, खतरे में कई इलाके,,,,

उत्तराखंड की संवेदनशील हिम झीलों पर बढ़ता खतरा: वसुंधरा झील में 11 महीने बाद भी नहीं लगा अर्ली वार्निंग सिस्टम, खतरे में कई इलाके,,,,


देहरादून: उत्तराखंड में संवेदनशील हिम झीलों से उत्पन्न होने वाले खतरे लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन इन्हें रोकने की दिशा में अभी भी ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। राज्य में कुल 13 हिम झीलें संवेदनशील मानी गई हैं, जिनमें से पाँच को अत्यंत संवेदनशील घोषित किया गया है। इन झीलों के जोखिम का मूल्यांकन करने के लिए एक विशेष सर्वेक्षण, जिसे ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) असेसमेंट सर्वे कहते हैं, कराया गया था।
इनमें से सबसे चिंताजनक स्थिति वसुंधरा झील की है। हालाँकि, इस झील का सर्वे अक्टूबर 2024 में ही पूरा हो गया था और रिपोर्ट भी सौंप दी गई थी, लेकिन 11 महीने बीत जाने के बाद भी यहाँ अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने का काम शुरू नहीं हो सका है। यह सिस्टम झील की निगरानी करता है और किसी भी खतरे की स्थिति में समय रहते चेतावनी जारी करता है, जिससे जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।
🔴सर्वे में सामने आए प्रमुख बिंदु🔴
पिछले साल किए गए सर्वे में उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA), वाडिया संस्थान, ITBP और NDRF की टीमों ने हिस्सा लिया था। इस रिपोर्ट में झील से पानी निकलने के दो संभावित क्षेत्रों की पहचान की गई है। इसके अलावा, हिमस्खलन और भूस्खलन जैसी स्थितियों का भी जिक्र किया गया है, जो इस झील के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं।
🔴जिम्मेदारियों को लेकर असमंजस🔴
अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने की योजना तो है, और इसके लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) से वित्तीय सहायता मिलने की भी बात कही जा रही है, लेकिन सबसे बड़ी बाधा जिम्मेदारी का बँटवारा है। अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि कौन सी संस्था यह सिस्टम लगाएगी और कौन इसके रख-रखाव और निगरानी की जिम्मेदारी संभालेगी। इस मुद्दे पर मंथन जारी है और बताया जा रहा है कि इस संबंध में मुख्य सचिव स्तर की बैठक में जल्द ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
यह देरी, एक ऐसे समय में जब जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर और उनसे बनी झीलें तेजी से पिघल रही हैं, उत्तराखंड के लिए एक बड़ा जोखिम है। इस महत्वपूर्ण कार्य में हो रही देरी से आपदा के खतरे की आशंका और भी बढ़ जाती है।

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