October 20, 2026

उत्तराखंड गांव के गरीबों के डॉक्टर से राजभवन के शिखर तक, आइए जानते है उत्तराखण्ड के नए राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन का प्रेरणादायी सफर,,,

उत्तराखंड गांव के गरीबों के डॉक्टर से राजभवन के शिखर तक, आइए जानते है उत्तराखण्ड के नए राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन का प्रेरणादायी सफर,,,

​देहरादून। चिकित्सा सेवा, ग्रामीण उत्थान और संसदीय राजनीति में जनसेवा की लंबी लकीर खींचने वाले वरिष्ठ राजनेता डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने उत्तराखण्ड के संवैधानिक प्रमुख के रूप में अपनी नई पारी की शुरुआत की है। गाँव के मजरा-टोलों में मरीजों का इलाज करने वाले एक आयुष चिकित्सक से लेकर महामहिम राज्यपाल के पद तक का उनका यह सफर सादगी, संघर्ष और दूरदर्शी फैसलों की मिसाल है।

​🟢 ग्रामीण पृष्ठभूमि और चिकित्सा सेवा का संकल्प

मध्य प्रदेश के सिवनी जिले स्थित पिपरिया गाँव के मूल निवासी डॉ. बिसेन का जन्म स्व. सेवाराम बिसेन और स्व. सोना बाई बिसेन के परिवार में हुआ। उन्होंने आयुष चिकित्सक के रूप में अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। वर्ष 1975 से 1990 तक लगातार 15 वर्षों तक उन्होंने सुदूर व पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को नि:स्वार्थ स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान कीं। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती भानुमति बिसेन हैं तथा परिवार में दो पुत्रियाँ और एक पुत्र डॉ. लकेश बिसेन (हड्डी रोग विशेषज्ञ) हैं।

​🟢 संसदीय राजनीति में मजबूत जनपक्षीय पकड़

स्वास्थ्य सेवा के माध्यम से आमजन के बीच बनी मजबूत पैठ ने उन्हें राजनीति की ओर प्रेरित किया। वर्ष 1990 में वे पहली बार मध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। इसके बाद जनता के विश्वास के बल पर उन्होंने वर्ष 1993, 1998 और 2003 में लगातार चार बार विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की। वर्ष 1998 में उन्हें विधानसभा में मुख्य सचेतक का अहम दायित्व सौंपा गया था। वर्ष 2019 के आम चुनाव में वे बालाघाट-सिवनी संसदीय सीट से भारी मतों से विजयी होकर लोकसभा पहुँचे।

​🟢 मंत्रित्व काल में लिए कई ऐतिहासिक व दूरगामी फैसले

मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री रहते हुए डॉ. बिसेन ने वन, परिवहन, सहकारिता, जेल, खनिज साधन, स्कूल शिक्षा तथा वित्त आयोग जैसे महत्वपूर्ण विभागों की कमान संभाली। वन मंत्री के पद पर रहते हुए उन्होंने क्रांतिकारी ‘तेंदूपत्ता नीति’ लागू कराई, जिससे आदिवासियों व वनोपज संग्राहकों को उनका हक मिला और वन विभाग का राजस्व 65 करोड़ रुपये से बढ़कर सीधे 116 करोड़ रुपये पहुँच गया। इसके अतिरिक्त छात्राओं को शिक्षा से जोड़ने के लिए ‘साइकिल प्रदाय योजना’ और बच्चों के समग्र विकास हेतु ‘मंगली उत्सव’ की शुरुआत कराने में भी उनकी प्रमुख भूमिका रही।

​अब डॉ. बिसेन अपने सुदीर्घ प्रशासनिक, सामाजिक और विधायी अनुभवों के साथ देवभूमि उत्तराखण्ड के संवैधानिक प्रमुख के रूप में प्रदेश के विकास और मार्गदर्शन में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।

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