October 1, 2026

उत्तराखंड नैनीताल के मल्ला निगलाट में फर्जी वारिस बनकर जमीन हड़पने का बड़ा खेल, कुमाऊं कमिश्नर ने दिए एफआईआर और सख्त कार्रवाई के निर्देश,,,

उत्तराखंड नैनीताल के मल्ला निगलाट में फर्जी वारिस बनकर जमीन हड़पने का बड़ा खेल, कुमाऊं कमिश्नर ने दिए एफआईआर और सख्त कार्रवाई के निर्देश,,,

​नैनीताल। तहसील श्री कैंचीधाम के अंतर्गत ग्राम सभा मल्ला निगलाट (पट्टी पाडली) में मृत व्यक्ति का फर्जी वारिस बनाकर करोड़ों की बेशकीमती भूमि हड़पने और आनन-फानन में उसकी रजिस्ट्री कराने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ग्रामीणों की सजगता से उजागर हुए इस फर्जीवाड़े पर कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने कड़ा रुख अपनाते हुए जिलाधिकारी नैनीताल को लैंड फ्रॉड की जांच, दोषियों पर मुकदमा (एफआईआर) दर्ज करने और संबंधित राजस्व कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के कड़े निर्देश दिए हैं।

​🔴 ऑनलाइन रजिस्ट्री जांचने से खुला फर्जीवाड़े का राज

​ग्रामवासियों ने 29 सितंबर 2026 को आयुक्त दीपक रावत को शिकायती पत्र देकर पूरे मामले से अवगत कराया था। शिकायतकर्ता मनिक मेहरा गांव की ऑनलाइन रजिस्ट्रियों पर नियमित नजर रखते थे। इसी दौरान उन्हें पता चला कि ओम प्रकाश नाम के एक अज्ञात व्यक्ति ने खुद को केशवदत्त (पुत्र चंद्रमणी) का वारिस दर्शाते हुए खाता संख्या 08 की खतौनी में अपना नाम दर्ज करा लिया है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि मल्ला निगलाट में ओम प्रकाश नाम का कोई व्यक्ति न तो रहता है और न ही गांव में उसकी कोई जमीन या काश्त है।

​🔴 1983 में हो चुकी थी मौत, 43 साल बाद फर्जी दस्तावेजों से वारिसान दर्ज

​शिकायत की गंभीरता को देखते हुए कमिश्नर दीपक रावत ने 30 सितंबर 2026 को अपने नैनीताल कार्यालय में कैंप लगाकर ग्रामीणों, तहसीलदार श्री कैंचीधाम, संबंधित राजस्व कर्मियों और अन्य पक्षों को तलब कर विस्तृत सुनवाई की।

सुनवाई के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि जिस केशवदत्त का वारिस बनकर जमीन दर्ज कराई गई, उनकी मृत्यु वर्ष 1983 में ही हो चुकी थी। इसके बावजूद वर्ष 2026 में फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और कूटरचित पहचान पत्रों के सहारे जमीन पर वारिसान दर्ज करा दिया गया।

​🔴 उम्र और पहचान में बड़ा झोल, एक महीने में बेच दी जमीन

​जांच में प्रथम दृष्टया सामने आया कि रजिस्ट्री में लगाया गया पहचान पत्र उत्तर प्रदेश के किसी अन्य व्यक्ति का प्रतीत हो रहा है, जिसकी वास्तविक आयु लगभग 40 से 50 वर्ष के बीच है, जबकि दस्तावेजों में उसे 73 वर्ष का दर्शाया गया है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस भू-माफिया सिंडिकेट में नरेश पाण्डे, संध्या बोरा, कर्नल विवेक भट्ट (निवासी रामगढ़), संजय बोहरा, ग्राम डोब की प्रधान पुष्पा देवी तथा हिमांशु (निवासी गोलापार) की मिलीभगत है। तहसील श्री कैंचीधाम के कानूनगो द्वारा 21 अगस्त 2026 को विरासतन नामांतरण पारित किया गया और साजिश के तहत ठीक एक महीने बाद इस भूमि को संध्या बोरा के नाम बैनामा (क्रय) भी कर दिया गया।

​🔴 कमिश्नर के कड़े निर्देश- दोषियों पर होगी एफआईआर, नपेंगे लापरवाह कर्मचारी 

​प्रकरण में बड़े स्तर पर भू-माफिया और राजस्व कर्मियों की साठगांठ उजागर होने पर कमिश्नर दीपक रावत ने जिलाधिकारी नैनीताल को विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं:

  1. ​पूरे प्रकरण की लैंड फ्रॉड एंगल से निष्पक्ष व गहन जांच की जाए।
  2. ​कूटरचित पहचान पत्र और फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार करने वालों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए।
  3. ​बिना स्थलीय सत्यापन के नामांतरण आदेश पारित करने वाले लापरवाह राजस्व अधिकारियों व कर्मचारियों पर विभागीय व अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

​🟢 कमिश्नर की अपील- नियमित जांचें अपने भूमि अभिलेख

​कुमाऊं कमिश्नर ने आम जनता से अपील की है कि वे अपनी भूमि और खतौनी से जुड़े सरकारी अभिलेखों की नियमित निगरानी करते रहें। यदि कहीं भी कोई संदिग्ध प्रविष्टि या अज्ञात नाम दर्ज दिखाई दे, तो तत्काल प्रभाव से तहसील व जिला प्रशासन को सूचित करें, ताकि भू-माफियाओं के मंसूबों पर पानी फेरा जा सके।

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