अजब – गजब, गोलगप्पे बेचने वाले का बेटा पहुंचा IIT, गरीबी और असफलता को हराकर हर्ष गुप्ता बने युवाओं के लिए सफलता की मिसाल,,,

देहरादून: सफलता की चमक के पीछे छिपे संघर्ष बहुत कम लोगों को नजर आते हैं, लेकिन महाराष्ट्र के हर्ष गुप्ता की कहानी उन युवाओं के लिए मिसाल है जो विपरीत हालात में भी सपने देखना नहीं छोड़ते। पानीपूरी (गोलगप्पे) बेचने वाले पिता के बेटे हर्ष गुप्ता ने 11वीं कक्षा में फेल होने के बावजूद हार नहीं मानी और कड़ी मेहनत से देश की सबसे कठिन परीक्षा JEE पास कर IIT रुड़की में दाखिला हासिल किया।
हर्ष गुप्ता का परिवार मुंबई के कल्याण क्षेत्र में एक छोटे से कमरे में रहता था। पिता संतोष गुप्ता दिनभर ठेला लगाकर पानीपूरी बेचते थे, जिससे मुश्किल से घर का खर्च चलता था। घर में माता-पिता के साथ हर्ष और उनके दो छोटे भाई शुभम व शिवम रहते थे। सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई करना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। न तो शांत कमरा था, न महंगी किताबें और न ही कोचिंग की सुविधा।
हर्ष की जिंदगी का सबसे कठिन दौर तब आया जब वह कक्षा 11वीं की परीक्षा में फेल हो गए। इस असफलता के बाद उन्हें समाज और आस-पड़ोस से ताने भी सुनने पड़े। लेकिन इसी असफलता ने उनके भीतर एक नई जिद पैदा कर दी। उन्होंने ठान लिया कि वह इस नाकामी को अपनी ताकत बनाएंगे और देश की सबसे कठिन परीक्षा JEE पास कर दिखाएंगे। हर्ष ने अपनी पढ़ाई के बेसिक्स पर काम किया और फिर कोटा जाकर तैयारी शुरू की, जिसमें परिवार का पूरा सहयोग मिला।
लगातार मेहनत और अनुशासन का परिणाम यह हुआ कि हर्ष गुप्ता ने JEE-Mains में 98.59 पर्सेंटाइल हासिल की और JEE-Advanced के लिए क्वालिफाई किया। पहले प्रयास में मनपसंद कॉलेज नहीं मिल पाने पर उन्होंने हार नहीं मानी और दोबारा परीक्षा दी। इस बार पहले से बेहतर रैंक प्राप्त कर उन्होंने अपने सपने को साकार किया और IIT रुड़की में दाखिला पाया।
आज हर्ष गुप्ता उन हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा हैं जो आर्थिक तंगी, असफलता और सामाजिक दबाव के कारण अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो तो मंजिल जरूर मिलती है।
हर्ष गुप्ता की यह सफलता न केवल उनके परिवार के लिए गर्व की बात है, बल्कि पूरे समाज के लिए यह सीख है कि असफलता अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत हो सकती है।

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