October 11, 2026

​उत्तराखंड उद्गम स्थल पर ही थमेगा प्रदूषण, उत्तरकाशी में ₹15 करोड़ का सीवरेज प्रोजेक्ट पूरा, भागीरथी हुई सुरक्षित,,,,

​उत्तराखंड उद्गम स्थल पर ही थमेगा प्रदूषण, उत्तरकाशी में ₹15 करोड़ का सीवरेज प्रोजेक्ट पूरा, भागीरथी हुई सुरक्षित,,,,

नई दिल्ली / उत्तरकाशी: राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने एक महत्वपूर्ण वक्तव्य में कहा है कि उत्तराखंड के उत्तरकाशी में ‘नमामि गंगे’ योजना के तहत विकसित किया गया सीवरेज नेटवर्क गंगा नदी की स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखने में बेहद अहम भूमिका निभा रहा है। मिशन के अनुसार, गंगा की शुद्धता को उसके उद्गम क्षेत्र से ही सुनिश्चित करने के ठोस प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि नदी का स्वच्छ और अविरल प्रवाह निचले मैदानी इलाकों तक भी निरंतर बना रहे।

​🟢 उद्गम स्थल की स्वच्छता क्यों है महत्वपूर्ण?

​भौगोलिक दृष्टि से उत्तरकाशी में प्रवाहित होने वाली भागीरथी नदी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही आगे चलकर अलकनंदा से संगम के बाद विशाल गंगा का स्वरूप ग्रहण करती है। एनएमसीजी ने विशेष रूप से रेखांकित किया है कि संपूर्ण गंगा बेसिन को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए हिमालयी क्षेत्र में नदी की सुरक्षा करना अनिवार्य है। मिशन के मुताबिक, यदि भागीरथी का जल अपने मूल स्रोत से ही स्वच्छ रहेगा, तो इसका सीधा सकारात्मक लाभ ऋषिकेश, हरिद्वार, प्रयागराज और वाराणसी जैसे प्रमुख शहरों तक पहुंचेगा।

​एनएमसीजी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किया कि गंगा की सुरक्षा की शुरुआत उसके उद्गम स्थल से ही होनी चाहिए। स्रोत पर नदी की स्वच्छता सुनिश्चित करना पूरी गंगा की पारिस्थितिकी (Ecology) और जल गुणवत्ता की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

​🟢 आपदा और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां बनी चुनौती

​मिशन के अनुसार, उत्तरकाशी जैसे विषम पहाड़ी क्षेत्र में सीवरेज नेटवर्क का पुनर्निर्माण करना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य था। क्षेत्र में आई प्राकृतिक आपदाओं के कारण पुराना बुनियादी ढांचा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था। इसके अतिरिक्त, खड़ी पहाड़ी ढलानों, निर्माण कार्य के लिए बेहद सीमित स्थान और कठोर चट्टानों की मौजूदगी के कारण यहां निर्माण कार्य करना इंजीनियरिंग के लिहाज से अत्यधिक कठिन था।

🟢 ​₹15 करोड़ की लागत से परियोजनाएं पूरी

​इन तमाम प्राकृतिक और भौगोलिक बाधाओं के बावजूद, वर्ष 2015 में शुरू की गई इस परियोजना को वर्ष 2017 में विशेष गति दी गई। इसके परिणामस्वरूप, वर्ष 2018 में ग्यासू स्थित दो एमएलडी (MLD) क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का उन्नयन कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया।

​लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत दोनों महत्वपूर्ण परियोजनाएं अब पूरी तरह से चालू हो चुकी हैं। इस आधुनिक प्रणाली के लागू होने के बाद, अब उत्तरकाशी शहर का समस्त अपशिष्ट जल (वेस्ट वाटर) सीधे नदी में नहीं बहता, बल्कि पूर्ण शोधन (ट्रीटमेंट) के बाद ही भागीरथी नदी में छोड़ा जा रहा है।

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