उत्तराखंड के मठ-आश्रमों में गद्दी और संपत्ति के लिए ही हो रहीं संतों की हत्याएं, हरिद्वार में खूनी संघर्ष का साढ़े तीन दशकों का इतिहास,,,

हरिद्वार (आवेश अंसारी): धर्मनगरी हरिद्वार में मठों, मंदिरों और आश्रमों की गद्दी तथा बेशकीमती संपत्तियों पर कब्जे को लेकर पिछले करीब साढ़े तीन दशकों से खूनी खेल चल रहा है। कई प्रमुख संतों की निर्मम हत्याएं हो चुकी हैं, जबकि कई संत आज तक रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हैं। हाल ही में पथरेश्वर मंदिर में दो साधुओं के दोहरे हत्याकांड ने इस पुराने इतिहास को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
तीन दशकों में घटीं प्रमुख हत्याएं और आपराधिक घटनाएं

- 1991: 25 अक्टूबर 1991 को रामायण सत्संग भवन के संत राघवाचार्य की स्कूटर सवार हमलावरों ने गोली मारकर और चाकू से गोदकर हत्या कर दी थी।
- 1993: 9 दिसंबर 1993 को उनके सहयोगी रंगाचार्य की ज्वालापुर में हत्या कर दी गई।
- 2000: 1 फरवरी 2000 को सूखी नदी स्थित मोक्षधाम की संपत्ति के विवाद में ट्रस्ट सदस्य गिरिश चंद पर जानलेवा हमला हुआ, जिसमें उनके साथी रमेश की मौत हो गई। इसी वर्ष 12 दिसंबर को अमेरिकी साध्वी प्रेमानंद की हत्या कर दी गई थी।
- 2001 से 2006: वर्ष 2001 में बाबा सुतेंद्र बंगाली, बाबा विष्णु गिरी समेत चार साधुओं; ब्रह्मानंद और बाबा ब्रह्मदत्त की हत्याओं ने सनसनी फैला दी थी। इसके बाद 2002 में बाबा हरिया व उनके शिष्य, 2004 में संत योगानंद, और 2006 में अमृतानंद व इंडिया टेंपल के बाल स्वामी की भी हत्या कर दी गई।
- 2012: श्रीपंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के महंत सुधीर गिरी की 14 अप्रैल 2012 को नौ लाख रुपये की सुपारी देकर हत्या कराई गई थी। इसमें दो साल बाद अखाड़े के तत्कालीन मुंशी, प्रॉपर्टी डीलर और शूटरों सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
- 2024: 1 जून 2024 को कनखल के श्रद्धा भक्ति आश्रम की करोड़ों रुपये की संपत्ति हड़पने के लिए महंत गोविंददास की हत्या कर शव को गंगा में फेंक दिया गया। आश्रम में फर्जी वसीयत के आधार पर एक नकली बाबा को बिठाकर करीब 10 करोड़ रुपये की संपत्ति बेचने की तैयारी थी। पुलिस ने इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया।
रहस्य बने संतों के लापता होने के मामले
हत्याओं के अलावा हरिद्वार से कई संतों का अचानक गायब हो जाना आज भी एक अनसुलझा रहस्य बना हुआ है:
- वर्ष 2007: योगगुरु बाबा रामदेव के गुरु स्वामी शंकरदेव कनखल आश्रम से रहस्यमय ढंग से लापता हो गए, जिनका आज तक कोई सुराग नहीं लग सका।
- वर्ष 2017: पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा के कोठारी महंत मोहनदास मुंबई जाने के लिए निकले थे, लेकिन रास्ते में लापता हो गए।
इन दोनों ही मामलों के पीछे गद्दी और संपत्ति विवाद की आशंका जताई जाती रही है। सीबीआई जांच के बावजूद इन मामलों का आज तक कोई नतीजा नहीं निकल सका है।

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