October 18, 2026

उत्तराखंड दिल्ली-दून एक्सप्रेसवे, आशारोड़ी-मोहब्बेवाला बना हादसों की ‘प्रयोगशाला’, लगातार प्रयोगों के बाद भी बेकाबू ट्रकों पर लगाम नहीं,,,

उत्तराखंड दिल्ली-दून एक्सप्रेसवे, आशारोड़ी-मोहब्बेवाला बना हादसों की ‘प्रयोगशाला’, लगातार प्रयोगों के बाद भी बेकाबू ट्रकों पर लगाम नहीं,,,

​देहरादून। दिल्ली-दून एक्सप्रेसवे पर आशारोड़ी से मोहब्बेवाला के बीच का करीब दो किलोमीटर का हिस्सा हादसों को रोकने की एक अंतहीन ‘प्रयोगशाला’ बनकर रह गया है। हर दुर्घटना के बाद प्रशासन की ओर से एक नया उपाय, नई कवायद और नई उम्मीदें तो सामने आती हैं, लेकिन बेकाबू भारी वाहनों और ट्रकों की रफ्तार पर कोई ठोस अंकुश नहीं लग पा रहा है। गुरुवार को सुबह के बाद देर रात हुए एक और ट्रक हादसे ने सुरक्षा दावों की कलई खोलकर रख दी है।

​🔴 उपायों की लंबी फेहरिस्त, नतीजे सिफर

वाहनों की गति थामने के लिए प्रशासन अब तक कई प्रयोग कर चुका है:

  • ​रंबल स्ट्रिप: करीब 500 मीटर के दायरे में स्पीड कंट्रोल के लिए रंबल स्ट्रिप बिछाई गईं।
  • ​24 घंटे टास्क फोर्स: डाटकाली-आशारोड़ी-मोहब्बेवाला मार्ग पर भारी वाहनों की सघन जांच के लिए टास्क फोर्स तैनात की गई, जिसने पहले ही दिन 350 से अधिक वाहनों की जांच की।
  • ​जागरूकता व साइन बोर्ड: चालकों को सचेत करने के लिए सूचना पट लगाने की तैयारी की गई।
  • ​जिग-जैग बैरिकेडिंग और कैमरे: अब दो किलोमीटर के इस संवेदनशील दायरे में जिग-जैग बैरिकेडिंग और गति सीमा का उल्लंघन पकड़ने वाले कैमरों के लिए 25 लाख रुपये जारी करने की संस्तुति की गई है।

​इन तमाम कोशिशों के बावजूद पिछले छह महीनों में इस हिस्से पर एक दर्जन से अधिक बड़े हादसे दर्ज हो चुके हैं। 20 सितंबर को सीमेंट लदा ट्रक पलटने से एक बाइक सवार की जान चली गई थी, वहीं 6 अक्टूबर को तेज रफ्तार ट्रक ने पुलिस बस को टक्कर मार दी थी।

​🔴 ढलान और सड़क की बनावट बनी चुनौती

तकनीकी रूप से डाटकाली सुरंग से बाहर निकलते ही भारी वाहन तेज ढलान से नीचे उतरते हैं, जिससे उनकी रफ्तार पर नियंत्रण पाना कठिन हो जाता है। आगे चेकपोस्ट और स्थानीय यातायात का दबाव स्थिति को और अधिक जोखिम भरा बना देता है। प्राथमिक तकनीकी निरीक्षणों में गति नियंत्रण, बेहतर प्रकाश व्यवस्था, संकेतक और चेकपोस्ट के सामने बने कट को दुरुस्त करने के सुझाव दिए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर किसी एकीकृत और समन्वित समाधान का अभाव साफ नजर आ रहा है।

​🟢 वैकल्पिक मार्ग से लेकर मंदिर बनाने तक के सुझाव

हादसों की रोकथाम को लेकर सुझावों का दायरा भी काफी विस्तृत रहा है। भारी वाहनों को मोहब्बेवाला की ओर आने से रोकने के लिए निर्माणाधीन आशारोड़ी-झाझरा फोरलेन से सीधे ट्रांसपोर्टनगर तक वैकल्पिक मार्ग बनाने का विचार सामने आया है। वहीं, स्थानीय आस्था के मद्देनजर दुर्घटना संभावित स्थल पर मंदिर निर्माण का प्रस्ताव भी रखा गया। हालांकि, विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि आस्था और अस्थाई सुझावों के बजाय सड़क की इंजीनियरिंग और तकनीकी खामियों को दूर करना ही स्थायी समाधान है।

​🟢 किसने क्या कहा:

​”जिला प्रशासन, पुलिस, परिवहन विभाग और एनएचएआई को अब तक के प्रयोगों की समीक्षा कर समयबद्ध कार्ययोजना बनानी होगी। हर हादसे के बाद नया प्रयोग और फिर अगली दुर्घटना का इंतजार करना समाधान नहीं है। अब सिर्फ प्रयोग नहीं, ठोस नतीजे चाहिए।- विनोद चमोली, विधायक (धर्मपुर)

 

​”आशारोड़ी चेकपोस्ट से मोहब्बेवाला तक वाहनों की गति नियंत्रित करने के लिए जिग-जैग बैरियर लगाए जाएंगे। स्पीड लिमिट डिस्प्ले बोर्ड और ऑनलाइन चालान के लिए कैमरे भी लगाए जा रहे हैं। हादसों को रोकने के लिए प्रशासन स्तर पर हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।”- डा. आशीष चौहान, जिलाधिकारी, देहरादून

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