August 11, 2026

उत्तराखंड नैनीताल में तूफान और एलपीजी संकट का दोहरा असर, 80 हजार आबादी प्रभावित, पर्यटन कारोबार पर पड़ा गहरा असर,,,,,

उत्तराखंड नैनीताल में तूफान और एलपीजी संकट का दोहरा असर, 80 हजार आबादी प्रभावित, पर्यटन कारोबार पर पड़ा गहरा असर,,,,,


नैनीताल। उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्यटन शहर नैनीताल में इन दिनों प्राकृतिक आपदा और एलपीजी संकट ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। हाल ही में आए भीषण तूफान और ओलावृष्टि के कारण बिजली व्यवस्था करीब 48 घंटे तक ठप रही, जिससे लगभग 80 हजार लोग प्रभावित हुए। इसी बीच रसोई गैस की कमी ने हालात को और गंभीर बना दिया है, जिससे होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट बंद होने लगे हैं।
अधिकारियों के अनुसार तेज आंधी-तूफान और भारी ओलावृष्टि के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ उखड़ गए, जिससे बिजली की कई लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं। इसका सीधा असर शहर और आसपास के क्षेत्रों—पदमपुरी, ओखलकांडा, सुखाताल और पाइन्स—पर पड़ा। दो दिनों तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने से घरों में अंधेरा छा गया, पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई और मोबाइल नेटवर्क भी बाधित रहा।
पर्यटकों से भरे इस शहर में होटल और गेस्ट हाउसों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर जनरेटर भी जवाब दे गए, जिससे मेहमानों को असुविधा झेलनी पड़ी। स्थानीय लोगों के अनुसार बिजली न होने से बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों की देखभाल और दैनिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुए। बिजली विभाग को इस आपदा से लगभग 50 से 60 लाख रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।
बिजली बहाली के लिए उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन की टीमें लगातार कार्यरत रहीं। दुर्गम क्षेत्रों में पेड़ हटाकर और टूटी लाइनों को जोड़कर सप्लाई बहाल की गई। कुमाऊं जोन के मुख्य अभियंता राजेंद्र गुंज्याल ने बताया कि विभाग की प्राथमिकता बिजली आपूर्ति बहाल करना थी, जिसमें सफलता मिली है। हालांकि जनजीवन पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लग रहा है।
इसी बीच शहर में एलपीजी गैस की कमी ने नया संकट खड़ा कर दिया है। घरेलू और व्यावसायिक दोनों तरह के सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित होने से शहर की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ा है। मल्लीताल क्षेत्र में कई रेस्टोरेंट, ढाबे और खानपान की दुकानें गैस के अभाव में बंद हो चुकी हैं। पर्यटन सीजन से ठीक पहले यह स्थिति स्थानीय कारोबारियों के लिए बड़ी चिंता का कारण बन गई है।
शहर के कई हिस्सों में रोडसाइड ढाबों पर ताले लटके हुए हैं, जबकि कुछ खुले प्रतिष्ठान सीमित मेन्यू के साथ काम चला रहे हैं। कई जगहों पर लकड़ी या वैकल्पिक ईंधन का सहारा लिया जा रहा है, लेकिन यह व्यवस्था स्थायी नहीं है। होटल एवं रेस्टोरेंट संचालकों ने प्रशासन से जल्द गैस आपूर्ति सामान्य कराने की मांग की है।
सूत्रों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे तनाव के कारण गैस सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसके चलते कमर्शियल गैस की आपूर्ति पर अस्थायी असर पड़ा है। इसका प्रभाव रामनगर, मुक्तेश्वर और हल्द्वानी जैसे क्षेत्रों में भी देखने को मिल रहा है, जहां होटल और रेस्टोरेंट कारोबार प्रभावित हो रहा है।
पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था वाले इस क्षेत्र में लगातार दोहरे संकट ने न केवल व्यापार को प्रभावित किया है, बल्कि रोजगार पर भी खतरा पैदा कर दिया है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो इसका असर लंबे समय तक देखने को मिल सकता है।

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