उत्तराखंड में 15 साल पुराने सरकारी वाहनों पर सख्ती, उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिया 60 दिन में स्क्रैप का अल्टीमेटम,,,,

देहरादून। पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील उत्तराखंड में 15 वर्ष की आयु सीमा पूरी कर चुके वाहनों को संचालन से बाहर कर स्क्रैप कराने के मामले में सरकारी विभागों की लापरवाही अब भारी पड़ सकती है। उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए सभी विभागों को 60 दिन के भीतर ऐसे वाहनों को अनिवार्य रूप से स्क्रैप कराने का अल्टीमेटम जारी किया है।
राज्य सरकार ने वर्ष 2023 में स्क्रैप नीति लागू कर आयु सीमा पार कर चुके वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की व्यवस्था की थी। इस नीति के तहत सरकारी विभागों के लिए अनुपालन अनिवार्य किया गया है, जबकि निजी वाहन स्वामियों के लिए इसे स्वैच्छिक रखा गया है।
नीति के अनुसार, निजी पुराने वाहनों को स्क्रैप कराने पर नए वाहन के पंजीकरण में अधिकतम 50 हजार रुपये तक की छूट दी जाती है। वहीं, पुराने व्यावसायिक वाहनों को स्क्रैप कराने पर नए व्यावसायिक वाहन के वार्षिक कर में आठ वर्षों तक 15 प्रतिशत की छूट का प्रावधान किया गया है।
नीति लागू होने के बावजूद सरकारी विभागों में अपेक्षित प्रगति नहीं दिखी है। आंकड़ों के अनुसार राज्य में 10 हजार से अधिक ऐसे वाहन हैं, जो 15 वर्ष की आयु सीमा पार कर चुके हैं। इनमें से अधिकांश जर्जर हालत में विभागीय परिसरों में खड़े हैं, जबकि कुछ अब भी सड़कों पर संचालित हो रहे हैं और प्रदूषण का कारण बन रहे हैं।
उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि पूर्व में भी विभागों को निर्देश दिए गए थे, लेकिन केवल कुछेक विभागों ने ही इसका पालन किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब 60 दिन के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित नहीं करने पर संबंधित विभागों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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