August 16, 2026

उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग के संविदा जेई के पक्ष में नैनीताल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, नियमितीकरण प्रक्रिया शुरू करने के दिए निर्देश,,,

उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग के संविदा जेई के पक्ष में नैनीताल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, नियमितीकरण प्रक्रिया शुरू करने के दिए निर्देश,,,

नैनीताल: नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के लोक निर्माण विभाग (PWD) में पिछले 10 से 15 वर्षों से कार्यरत संविदा कनिष्ठ अभियंताओं (जूनियर इंजीनियरों) को बड़ी राहत दी है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को उनके समायोजन और नियमितीकरण की प्रक्रिया अविलंब शुरू करने के कड़े निर्देश दिए हैं। यह महत्वपूर्ण फैसला न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान आया।

🔴 सेवा से हटाए जाने के खिलाफ दर्ज हुई थीं याचिकाएं

मामले के अनुसार, प्रसून नौटियाल व कई अन्य संविदा जूनियर इंजीनियरों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कर बताया था कि वे एक दशक से भी अधिक समय से लोक निर्माण विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे थे। इसके बावजूद विभाग ने उनकी संविदा अवधि का विस्तार न करते हुए उन्हें काम से हटा दिया था और उनके नियमितीकरण के दावों को भी खारिज कर दिया था। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से सेवा में पुनः बहाली और नियमितीकरण की मांग की थी।

🟢 वरिष्ठता को दरकिनार करने पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को अवगत कराया गया कि अंतरिम आदेशों के तहत 102 संविदा अभियंताओं (83 रिक्त पदों तथा 19 पदोन्नति से बने पदों) को समायोजित किया जा चुका है। इस पर याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि जिन अभ्यर्थियों के पास अंतरिम आदेश देरी से आए या नहीं आ सके, उन्हें वरिष्ठ होने के बावजूद सूची से बाहर कर दिया गया। अदालत ने इस पर स्पष्ट रूप से कहा कि केवल अंतरिम आदेश की तिथि के आधार पर किसी भी योग्य और वरिष्ठ अभ्यर्थी को समायोजन से वंचित नहीं किया जा सकता।

🟢 छूटे अभ्यर्थियों के समायोजन और नियमितीकरण के स्पष्ट निर्देश

हाईकोर्ट ने अपने अंतिम आदेश में निर्देश दिया कि छूटे हुए सभी संविदा जूनियर इंजीनियरों को दिव्यांग श्रेणी के लिए आरक्षित 10 पदों पर (जब तक कि नियमित अभ्यर्थी न आ जाएं) और भविष्य में आने वाली रिक्तियों के सापेक्ष समायोजित किया जाए। इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि सभी याचिकाकर्ताओं का समायोजन करने के पश्चात, उनके नियमितीकरण के पूर्व में खारिज किए गए दावों को निरस्त मानते हुए नियमानुसार उनके नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू की जाए।

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