उत्तराखंड हरिद्वार सड़कों की बदहाली पर भड़के संत, भूपतवाला में लीपापोती का आरोप, कुंभ के भव्य आयोजन की तैयारियों पर उठाए सवाल,,,

हरिद्वार। आगामी कुंभ मेले से ठीक पहले धर्मनगरी हरिद्वार की सड़कों की खस्ताहाली ने संत समाज की चिंता बढ़ा दी है। विश्व सद्भावना मंदिर के परमाध्यक्ष आचार्य पारस मुनि ने भूपतवाला क्षेत्र में सड़क निर्माण के नाम पर बरती जा रही अनियमितताओं और लीपापोती पर कड़ा आक्रोश जताया है। उन्होंने कहा कि कुंभ मेले के शुरू होने में महज तीन महीने का समय शेष है, ऐसे में प्रमुख मार्गों की जर्जर स्थिति अत्यंत चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है।
तारकोल डालकर खानापूरी, बजट खत्म होने का रोना
आचार्य पारस मुनि ने सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्तमान में निर्माण के नाम पर सिर्फ तारकोल बिछाकर खानापूरी की जा रही है। जब इस लापरवाही को लेकर संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया जाता है, तो वे बजट समाप्त होने का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं।
वर्ष 2009 के बाद नहीं हुई सुध, मुख्यमंत्री के निर्देशों की अनदेखी

संतों ने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि भूमा निकेतन, वैष्णो देवी मंदिर और भारत माता मंदिर मार्ग का निर्माण वर्ष 2009 में कराया गया था। इसके बाद से अब तक इस मार्ग की कोई उचित देखरेख या मरम्मत नहीं की गई, जिसके चलते यह मार्ग पूरी तरह जर्जर और खस्ताहाल हो चुका है। उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए ‘गड्ढामुक्त सड़क’ के आदेशों का धरातल पर पालन न होने को लेकर भी शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लिया।
लाखों श्रद्धालुओं और संतों का आवागमन, त्वरित कार्रवाई की मांग

महामंडलेश्वर साध्वी भगवती पुरी ने भी क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण व बेहतर सड़क निर्माण की मांग का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सड़कों की ऐसी दुर्दशा कुंभ मेले के भव्य और सुव्यवस्थित आयोजन के दावों पर प्रश्नचिह्न लगाती है।
साध्वी भगवती पुरी ने रेखांकित किया कि भूपतवाला क्षेत्र में अनेक प्रमुख आश्रम और प्रतिष्ठित मंदिर स्थित हैं। कुंभ मेले के दौरान यहां लाखों की संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु, तीर्थयात्री और साधु-संत पहुंचेंगे। बदहाल मार्गों को लेकर संपूर्ण संत समाज उद्वेलित है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि किसी भी प्रकार की दुर्घटना या अव्यवस्था से बचने के लिए युद्धस्तर पर सड़कों की मरम्मत व सुदृढ़ीकरण का कार्य तत्काल पूरा कराया जाए।

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