October 11, 2026

“धर्म – कर्म” मां शैलपुत्री की विधिवत आराधना से जीवन में आएगी सुख-समृद्धि- श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी

“धर्म – कर्म” मां शैलपुत्री की विधिवत आराधना से जीवन में आएगी सुख-समृद्धि- श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी

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​हरिद्वार। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं श्री मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज ने श्रद्धालुओं को नवरात्र की शुभकामनाएं देते हुए मां भगवती के प्रथम स्वरूप ‘मां शैलपुत्री’ के महत्व पर प्रकाश डाला।

“शारदीय नवरात्र के पहले दिन मां के प्रथम स्वरूप की उपासना, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने श्रद्धालुओं को बताई पूजा-विधि और मंत्र”

उन्होंने कहा कि सच्चे मन और पूर्ण निष्ठा से की गई मां भगवती की उपासना से मनुष्य के जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

​🏵 शक्ति, आस्था और नारी सम्मान का पर्व

श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी ने कहा कि मां शैलपुत्री शक्ति, आस्था और दृढ़ संकल्प की साक्षात प्रतीक हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि नवरात्र केवल पूजा-अर्चना का ही पर्व नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति, आस्था और मातृशक्ति (नारी शक्ति) के सर्वोच्च सम्मान का भी प्रतीक है। मां दुर्गा की साधना मनुष्य को धर्म, सेवा, संयम और सदाचार के पवित्र मार्ग पर चलने की आंतरिक प्रेरणा प्रदान करती है। मां के आशीर्वाद से भक्तों को जीवन में धैर्य, आत्मविश्वास और सद्बुद्धि की प्राप्ति होती है।

​🏵कलश स्थापना और पूजा-विधि की दी जानकारी

श्रीमहंत ने श्रद्धालुओं को मां शैलपुत्री की सरल और शास्त्रोक्त पूजन विधि के बारे में बताते हुए कहा कि:

  • ​नवरात्र के पहले दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को अच्छी तरह शुद्ध व साफ करें।
  • ​शुभ मुहूर्त में विधि-विधान के साथ कलश स्थापना करें और मां दुर्गा व शैलपुत्री देवी का ध्यान लगाएं।
  • ​मां को पुष्प, अक्षत, चंदन, धूप-दीप, फल और नैवेद्य (मिठाई) अर्पित करें।
  • ​मां शैलपुत्री को सफेद पुष्प अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए पूजन में सफेद पुष्प विशेष रूप से अर्पित करना शुभ माना गया है।
  • ​पूजा के दौरान ‘ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः’ मंत्र का एकाग्रचित्त होकर जप करें तथा दुर्गा सप्तशती अथवा दुर्गा चालीसा का पाठ करें।

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