August 15, 2026

अखंड वैवाहिक सुख का प्रतीक हरियाली तीज, आइए जानते है माता पार्वती और शिव के मिलन की यह विशेष कथा, व्रत और पूजा विधि,,,

अखंड वैवाहिक सुख का प्रतीक हरियाली तीज, आइए जानते है माता पार्वती और शिव के मिलन की यह विशेष कथा, व्रत और पूजा विधि,,,

देहरादून। सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं का पवित्र पर्व हरियाली तीज हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह व्रत अखंड वैवाहिक सुख और मनचाहा वर प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। आइए जानते हैं इस पर्व की पौराणिक कथा, शुभ मुहूर्त और पूजा की संपूर्ण विधि।

🏵 माता पार्वती का जन्म और विवाह प्रस्ताव

हरियाली तीज की पौराणिक कथा के अनुसार, पर्वतराज हिमालय और मीना देवी के घर माता पार्वती का जन्म हुआ था, जो मन ही मन भगवान शिव को अपना पति मान चुकी थीं। जब माता पार्वती विवाह योग्य हुईं, तब नारद मुनि ने पर्वतराज हिमालय के पास जाकर उनका विवाह भगवान विष्णु से कराने का प्रस्ताव रखा, जिसे हिमालय राज ने स्वीकार कर लिया।

🏵 माता पार्वती की कठोर तपस्या और शिवलिंग निर्माण

जब माता पार्वती को यह बात पता चली तो वह बहुत दुखी हुईं और अपनी सखी को अपनी बात बताई। सखी उन्हें लेकर एक घने जंगल और गुफा में चली गईं, जहाँ माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या शुरू की। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को माता पार्वती ने रेत और मिट्टी से शिवलिंग बनाकर कठोर आराधना की। उनकी इस कठिन तपस्या और भक्ति से भगवान शिव प्रसन्न हुए।

🏵 शिव-पार्वती मिलन और व्रत का महत्व

महादेव ने प्रकट होकर माता पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया। इसके बाद पर्वतराज हिमालय की सहमति से भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ। मान्यता है कि जो सुहागिन महिलाएं हरियाली तीज का व्रत पूरी निष्ठा और विधि-विधान से करती हैं, उन्हें माता पार्वती की तरह अचल सुहाग और अखंड वैवाहिक सुख का वरदान मिलता है। इसके अलावा, कुंवारी कन्याएं भी मनचाहा और योग्य वर पाने के लिए यह व्रत रखती हैं।

🏵 पूजा के शुभ मुहूर्त

इस पर्व के लिए शुभ मुहूर्तों में ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:00 बजे से 05:41 बजे तक,

अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:45 बजे से 01:40 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त रात 08:03 बजे से 08:23 बजे तक निर्धारित किया गया है।

🏵 व्रत एवं पूजा विधि

पूजा विधि के तहत सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और हरे या लाल वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाकर भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। माता पार्वती को सोलह श्रृंगार (चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी, आभूषण) और शिव जी को बेलपत्र, धतूरा, शमी पत्र व श्वेत वस्त्र अर्पित करें। अंत में हरियाली तीज की व्रत कथा सुनें, “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें और विधिवत आरती करें।

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