July 24, 2026

उत्तराखंड UTU पेपर लीक मामले में दून पुलिस ने शिवालिक कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर आशीष कुमार को किया गिरफ्तार,,,,

उत्तराखंड UTU पेपर लीक मामले में दून पुलिस ने शिवालिक कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर आशीष कुमार को किया गिरफ्तार,,,,

देहरादून: उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (UTU) की सेमेस्टर परीक्षा के कथित प्रश्नपत्र लीक मामले में प्रेमनगर कोतवाली पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के सहायक प्रोफेसर आशीष कुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि उन्होंने परीक्षा से ठीक पहले छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुप और कॉलेज के आंतरिक पोर्टल पर ऐसे प्रश्न साझा किए थे, जो परीक्षा में आए प्रश्नों से हूबहू मेल खा रहे थे।

🔴 WhatsApp ग्रुप के जरिए लीक हुए सवाल

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले का खुलासा परीक्षा के बाद विश्वविद्यालय को प्राप्त हुई एक ई-मेल शिकायत के जरिए हुआ। शिकायतकर्ता ने दावा किया था कि 3 जुलाई को सहायक प्रोफेसर द्वारा व्हाट्सएप ग्रुप पर कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न साझा किए गए थे। जब 8 जुलाई को आयोजित सेमेस्टर परीक्षा के प्रश्नपत्र से इन प्रश्नों का मिलान किया गया, तो अधिकांश सवाल समान पाए गए।

🔴 विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच में पुष्टि, सेवा से बर्खास्त

​शिकायत को गंभीरता से लेते हुए UTU प्रशासन ने तत्काल एक आंतरिक जांच समिति का गठन किया। जांच में प्रोफेसर पर लगे आरोप सही पाए गए, जिसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने उन्हें तुरंत प्रभाव से बर्खास्त कर दिया। इसके पश्चात विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की औपचारिक शिकायत दून पुलिस से की।

🔴 BNS की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज

​विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनय कुमार पटेल की तहरीर के आधार पर प्रेमनगर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316, 318(4) और 61(2) के तहत मामला पंजीकृत किया गया। पुलिस ने डिजिटल रिकॉर्ड, दस्तावेजी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को आधार बनाते हुए आरोपी प्रोफेसर को गिरफ्तार किया।

🔴 इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच जारी, अन्य गिरफ्तारियों की संभावना

​दून पुलिस आरोपी के पास से जब्त किए गए मोबाइल फोन व अन्य डिजिटल उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज रही है। पुलिस का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि गोपनीय प्रश्न पत्र कहां से और किस माध्यम से लीक हुआ। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यदि इस जांच में किसी बड़े गिरोह या विश्वविद्यालय के अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता पाई जाती है, तो जल्द ही कुछ और गिरफ्तारियां भी संभव हैं।

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