September 10, 2026

उत्तराखंड के नैनीताल में एंट्री पर ‘टैक्स का तगड़ा झटका’, बाहरी बाइकों पर ₹100 और कारों पर लगेगा ₹300 शुल्क, जनता में भारी आक्रोश,,,

उत्तराखंड के नैनीताल में एंट्री पर ‘टैक्स का तगड़ा झटका’, बाहरी बाइकों पर ₹100 और कारों पर लगेगा ₹300 शुल्क, जनता में भारी आक्रोश,,,

नैनीताल: उत्तराखंड की पर्यटन राजधानी कहे जाने वाले सरोवर नगरी नैनीताल में कदम रखना अब आम आदमी और पर्यटकों की जेब पर भारी पड़ने वाला है. पार्किंग शुल्क और ग्रीन टैक्स के बाद अब नगर पालिका नैनीताल ने बाहरी जिलों और अन्य राज्यों से आने वाले दोपहिया वाहनों (बाइक और स्कूटी) पर भी ₹100 का एंट्री टैक्स (चुंगी) लागू कर दिया है. बुधवार रात 12 बजे से लागू हुई इस नई व्यवस्था के तहत तल्लीताल लेक ब्रिज, बारापत्थर और फांसी गधेरा चुंगी नाकों पर वसूली शुरू हो गई है. नगर पालिका ने इसके लिए ₹24.55 करोड़ में चुंगी वसूली का ठेका गाजियाबाद की कंपनी ‘एमजी इन्फ्रा’ को दिया है, जो मार्च 2028 तक प्रभावी रहेगा।

“बिना बोर्ड बैठक प्रस्ताव पास कराए गाजियाबाद की कंपनी को ₹24.55 करोड़ का ठेका देने पर बवाल; सभासदों का मनमानी का आरोप”

​इस फैसले के सामने आते ही स्थानीय लोगों और सैलानियों में भारी आक्रोश फैल गया है. सोशल मीडिया पर लोग तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पूछ रहे हैं- “क्या अब नैनीताल में पैदल चलने और सांस लेने पर भी टैक्स देना होगा?”

🔴 नियमों को ताक पर रखकर ठेका देने का आरोप, सभासदों का धरना

​नगरपालिका द्वारा नगर प्रवेश शुल्क के टेंडर को 21 महीने के लिए गाजियाबाद की कंपनी को देने की भनक लगते ही नगर पालिका नैनीताल के सभासदों ने तल्ख रुख अपना लिया. सभासद जितेंद्र पाण्डेय के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों ने भारी विरोध और धरना प्रदर्शन किया.

​विवाद बढ़ता देख नगरपालिका अध्यक्ष सरस्वती खेतवाल ने सभासदों को लिखित आश्वासन दिया था कि बिना बोर्ड बैठक में पास कराए यह टेंडर नहीं दिया जाएगा. नगरपालिका की बोर्ड बैठक 18 जुलाई 2026 को प्रस्तावित थी, लेकिन आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर मनमाने तरीके से अध्यक्ष द्वारा 16 जुलाई 2026 को ही चुपके से ठेका गाजियाबाद की कंपनी को सौंप दिया गया.

🔴 समझें टैक्स का पूरा गणित- किन्हें मिलेगी राहत और किसकी ढीली होगी जेब

​नई व्यवस्था के अनुसार शुल्क का निर्धारण कुछ इस प्रकार किया गया है:

वाहन का प्रकार

पंजीकरण / क्षेत्र

देय एंट्री शुल्क (टैक्स)

दोपहिया वाहन (बाइक/स्कूटी)

केवल यूके-04 (नैनीताल जिला)

निःशुल्क (टैक्स मुक्त)

दोपहिया वाहन (बाइक/स्कूटी)

उत्तराखंड के अन्य जिले व बाहरी राज्य

₹100

चारपहिया वाहन (कार/एसयूवी)

स्थानीय वाहन

₹200

चारपहिया व बड़े वाहन

नैनीताल जिले के अलावा अन्य जिले व राज्य

₹300

स्थानीय निवासी पास

नैनीताल शहर के निवासी (वार्षिक)

₹800

🔴 “क्या अपने ही शहर लौटने की भी कीमत चुकानी होगी?”

​इस नए टैक्स के कारण सबसे ज्यादा गुस्सा स्थानीय जनता में देखने को मिल रहा है. लोगों का कहना है कि नैनीताल के हजारों परिवारों के बच्चे पढ़ाई और नौकरी के सिलसिले में दूसरे शहरों में रहते हैं. उन्होंने वहीं से अपने वाहन खरीदे हैं, ऐसे में जब भी वे अपने घर लौटेंगे, उन्हें हर बार एंट्री टैक्स देना पड़ेगा. जनता सवाल उठा रही है कि क्या बच्चों को अपने ही घर आने के लिए जुर्माना देना होगा?

​स्थानीय निवासियों का कहना है कि पर्यटन पर निर्भर इस शहर में लगातार नए-नए टैक्स लगाकर आखिर किसे लाभ पहुंचाया जा रहा है? पहले पार्किंग शुल्क, फिर ग्रीन टैक्स और अब बाइक पर भी एंट्री टैक्स-ऐसा लगता है मानो नैनीताल आने वाला हर व्यक्ति प्रशासन के लिए केवल राजस्व का स्रोत बनकर रह गया हो.

🔴 पर्यटन पर पड़ सकता है बुरा असर

​नगर पालिका भले ही इसे राजस्व बढ़ाने और व्यवस्था सुधारने का कदम बता रही हो, लेकिन आम जनता इसे सीधे-सीधे ‘जेब पर डाका’ मान रही है. पर्यटन विशेषज्ञों का भी मानना है कि किसी भी पर्यटन स्थल की सबसे बड़ी ताकत उसकी सहज और सुलभ पहुंच होती है. यदि हर कदम पर टैक्स और शुल्क का बोझ बढ़ाया जाएगा, तो इसका सीधा नकारात्मक असर पर्यटकों की संख्या और शहर की पर्यटन-अनुकूल छवि पर पड़ेगा.

​अब देखना यह होगा कि जनता और सभासदों के इस भारी विरोध के बाद प्रशासन इस फैसले पर पुनर्विचार करता है या फिर राजस्व बढ़ाने की इस होड़ में नैनीताल अपनी मूल पहचान खो देगा.

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