उत्तराखंड धामी कैबिनेट में किसानों की आमदनी बढ़ाने को कार्बन क्रेडिट की तैयारी अनुपूरक बजट में ₹70 करोड़ का रखा प्रविधान,,,,

गैरसैंण। उत्तराखंड में किसानों की आर्थिकी मजबूत करने और उन्हें अतिरिक्त आय से जोड़ने के लिए राज्य सरकार ने कार्बन क्रेडिट की दिशा में ठोस कदम आगे बढ़ाए हैं। उत्तराखंड जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना के तहत जलागम विभाग इसका फिजिबिलिटी (व्यावहारिकता) अध्ययन करा रहा है। इस मुहिम को गति देने के लिए सरकार ने अनुपूरक बजट में परियोजना के मद में 70 करोड़ रुपये का प्रविधान किया है।
हैदराबाद की फर्म के साथ हुआ एमओयू
जलागम विभाग ने हैदराबाद की विशेषज्ञ कंपनी ‘कोर कार्बन एक्स’ के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह फर्म अध्ययन के बाद शासन को विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी, जिसमें कार्बन क्रेडिट के लिए उपयुक्त भूमि, इच्छुक किसानों और अपनाई जाने वाली गतिविधियों का पूरा ब्योरा शामिल होगा। इसके अतिरिक्त, कार्बन क्रेडिट के औपचारिक पंजीकरण के लिए अनिवार्य प्रोजेक्ट डेवलपमेंट डाक्यूमेंट (पीडीडी) भी फर्म द्वारा तैयार किया जाएगा। अध्ययन का दायरा आवश्यकतानुसार परियोजना क्षेत्र के आसपास के क्षेत्रों तक बढ़ाया जाएगा, ताकि आगे चलकर इसे पूरे प्रदेश के लिए एक स्थायी मॉडल के रूप में लागू किया जा सके।
बंजर व छोड़ी गई भूमि पर कृषि औद्यानिकी मॉडल
वर्ष 2023 में स्वीकृत हुई यह परियोजना 2024 से राज्य के आठ जनपदों—अल्मोड़ा, नैनीताल, ऊधम सिंह नगर, पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी, हरिद्वार व रुद्रप्रयाग की 519 ग्राम पंचायतों में संचालित की जा रही है। इसके तहत किसानों द्वारा छोड़ी गई कृषि योग्य भूमि पर कृषि औद्यानिकी (एग्रो-हॉर्टिकल्चर) मॉडल विकसित किया जा रहा है। इससे भूमि की उर्वरता और उत्पादकता सुधरने के साथ ही किसानों को नियमित और अतिरिक्त आय का नया जरिया मिलेगा।
खाद्य प्रसंस्करण, सहकारिता और मधुमक्खी पालन को भी प्रोत्साहन

अनुपूरक बजट में कृषि व संबद्ध क्षेत्रों के लिए कई अन्य अहम वित्तीय प्रविधान किए गए हैं:
- पीएमएफएमई योजना: सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों (पीएमएफएमई) को गति देने के लिए 35 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिससे राज्यभर में पीएमएफएमई स्टोर तेजी से खोले जा सकेंगे।
- किसान कल्याण योजना: दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के तहत 30 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।
- गोसदन निर्माण: बेसहारा गोवंश के संरक्षण व गोसदनों के बुनियादी ढांचे के लिए आठ करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ है।
- मौनपालन नीति: राज्य की नई मौनपालन नीति के तहत शहद उत्पादन और मधुमक्खी पालकों को बढ़ावा देने के लिए एक करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है।

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