August 12, 2026

देहरादून ‘लीडर और पॉलिटिशियन’ बनाम ‘ज्योतिष और तांत्रिक’ टिप्पणी पर मचा बवाल, वक्ता ने दी सफाई,,,,

देहरादून ‘लीडर और पॉलिटिशियन’ बनाम ‘ज्योतिष और तांत्रिक’ टिप्पणी पर मचा बवाल, वक्ता ने दी सफाई,,,

देहरादून। राजधानी में परसों स्वराज आश्रम में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिए गए संबोधन के बाद “लीडर एवं पॉलिटिशियन” तथा “ज्योतिष एवं तांत्रिक” की तुलना को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी चर्चा शुरू हो गई। बयान के वायरल होने के बाद कई लोगों ने इसे किसी विशेष व्यक्ति की ओर इशारा मानते हुए तरह-तरह के कयास लगाने शुरू कर दिए।
हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद वक्ता ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनके बयान का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष पर टिप्पणी करना नहीं था, बल्कि समाज और राजनीति में मौजूद एक प्रवृत्ति को समझाने का प्रयास था। उन्होंने कहा कि यदि लोग थोड़े विवेक और समझ का इस्तेमाल करते, तो स्पष्ट हो जाता कि उनका इशारा किसी व्यक्ति की ओर नहीं बल्कि विचार और व्यवहार के अंतर की ओर था।

लीडर और पॉलिटिशियन के बीच अंतर
अपने स्पष्टीकरण में उन्होंने कहा कि एक लीडर अपने साथियों के लिए अवसर पैदा करता है, उन्हें अपनी पूंजी और ताकत मानता है तथा न्याय-अन्याय के आधार पर निर्णय लेता है। वह स्पष्टवादी, प्रेरणादायक और विश्वसनीय व्यक्तित्व का धनी होता है।
इसके विपरीत, उनके अनुसार पॉलिटिशियन अक्सर अकेले खेलता है और उसकी योजनाएँ केवल स्वयं के हित पर केंद्रित रहती हैं। ऐसे व्यक्ति के सहयोगी भी उसकी रणनीति को लेकर असमंजस में रहते हैं। उन्होंने कहा कि पॉलिटिशियन अपने साथियों को साधन की तरह उपयोग कर सकता है और उसके निर्णयों में न्याय-अन्याय की बजाय व्यक्तिगत समीकरण अधिक अहम होते हैं।

ज्योतिष और तांत्रिक की तुलना
वक्ता ने अपने संबोधन में ज्योतिष और तांत्रिक के बीच भी अंतर स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि ज्योतिषी कुंडली का अध्ययन कर व्यक्ति के मजबूत और कमजोर ग्रहों के आधार पर सकारात्मक उपाय सुझाता है तथा वैदिक विधियों के माध्यम से मार्गदर्शन करता है।
वहीं, तांत्रिक के बारे में उन्होंने कहा कि उसकी छवि अक्सर भय और नकारात्मकता से जुड़ी होती है, जहाँ दूसरों के नुकसान या विनाश के उपायों पर अधिक जोर दिया जाता है।
‘दो अलग-अलग प्रवृत्तियाँ’
उन्होंने अपने विश्लेषण में कहा कि लीडर और ज्योतिष एक सकारात्मक श्रेणी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि पॉलिटिशियन और तांत्रिक नकारात्मक प्रवृत्तियों का प्रतीक हैं। उनका कहना था कि यह तुलना किसी व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए नहीं बल्कि आत्ममंथन के लिए एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत की गई थी।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए यह विचार करें कि वे स्वयं या जिन नेताओं से जुड़े हैं, वे किस श्रेणी के करीब आते हैं।
अपने वक्तव्य के अंत में उन्होंने एक शेर भी उद्धृत किया 
“हर सिम्त से लगेंगे तुझे पत्थर आकर,
ये झूठ की दुनिया है, यहाँ सच ना कहा कर।”
इस स्पष्टीकरण के बाद भी सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर चर्चा जारी है और लोग अपने-अपने नजरिये से बयान की व्याख्या कर रहे हैं।

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