अल्मोड़ा के रवि टम्टा ने बनाई देश की पहली इलेक्ट्रिक ‘फ्लाइंग कार’, पहाड़ के सपनों को दी नई उड़ान,,,,,,

अल्मोड़ा,उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले के जागेश्वर धाम के पास कफलिखान गांव निवासी रवि टम्टा ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। बिना किसी औपचारिक इंजीनियरिंग की पढ़ाई के, केवल स्नातक (BA) की डिग्री रखने वाले 29 वर्षीय रवि ने अपनी कड़ी मेहनत और इंटरनेट के सहयोग से देश की पहली स्वदेशी सिंगल-सीटर इलेक्ट्रिक ‘फ्लाइंग कार’ (HAPIDA SKYNeX) का सफल प्रोटोटाइप तैयार किया है। हाल ही में अल्मोड़ा के एक हेलीपैड पर जिला प्रशासन और विशेषज्ञों की मौजूदगी में इसका पहला सफल परीक्षण भी किया गया।
पहाड़ की विषम भौगोलिक परिस्थितियों ने दी प्रेरणा
पहाड़ी इलाकों में घुमावदार सड़कों के कारण कुछ किलोमीटर का सफर तय करने में भी घंटों का समय लग जाता है, जिससे मेडिकल इमरजेंसी के दौरान मरीज़ों को अस्पताल पहुंचाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या का स्थाई समाधान खोजने के उद्देश्य से रवि ने वर्ष 2015 से पर्सनल एयर मोबिलिटी पर शोध शुरू किया था। उनका मुख्य लक्ष्य पहाड़ी क्षेत्रों में लगने वाले 1.5 घंटे के सफर को हवा के रास्ते महज 10 से 15 मिनट में समेटना है।
अत्याधुनिक VTOL तकनीक से लैस है यह वाहन
रवि द्वारा विकसित यह वाहन पूरी तरह से ‘वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग’ (VTOL) तकनीक पर काम करता है, जिसका अर्थ है कि इसे उड़ने या उतरने के लिए किसी लंबे रनवे की आवश्यकता नहीं होती। यह कार ड्रोन तकनीक की तर्ज पर बनाई गई है और पूरी तरह से बैटरी (इलेक्ट्रिक) से संचालित होती है। शून्य कार्बन उत्सर्जन वाले इस वाहन में मल्टीपल प्रोपेलर्स लगे हैं, जो इसे हवा में स्थिर रखते हुए दिशा प्रदान करते हैं। रवि ने इस नवाचार को अपनी स्टार्टअप कंपनी ‘हापिडा स्काई प्राइवेट लिमिटेड’ के तहत पंजीकृत कराया है।
इंटरनेट से सीखी एयरोडायनामिक्स, पिता की वर्कशॉप में गढ़ा सपना
रवि के पिता हरीश राम पेशे से एक ऑटो मैकेनिक हैं। घर में सीमित संसाधन और कोई बड़ा तकनीकी बैकग्राउंड न होने के बावजूद रवि का हौसला पस्त नहीं हुआ। उन्होंने इंटरनेट के माध्यम से एरोनॉटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और एयरोडायनामिक्स के सिद्धांत सीखे। पिता के औजारों और अपनी लगन के दम पर रवि ने करीब 13 वर्षों की निरंतर रिसर्च और मेहनत के बाद इस फ्लाइंग कार का ढांचा तैयार किया। इससे पहले भी रवि दृष्टिबाधितों के लिए स्मार्ट छड़ी और चलते-चलते मोबाइल चार्ज करने वाले जूते जैसे कई उपयोगी आविष्कार बना चुके हैं।
अनुमति और आगे की चुनौतियाँ
रवि का यह प्रोजेक्ट फिलहाल प्रोटोटाइप और शुरुआती परीक्षण चरण में है। इसे आम लोगों के व्यावसायिक इस्तेमाल या मेडिकल रिस्पॉन्स के रूप में धरातल पर उतारने से पहले नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से उड़ान की औपरचारिक मंजूरियों, उन्नत सुरक्षा परीक्षणों और पेलोड (वजन उठाने की क्षमता) को बढ़ाने की प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।
प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित कई तकनीकी दिग्गजों ने रवि के इस नवाचार की सराहना करते हुए उन्हें हर संभव प्रोत्साहन का भरोसा दिया है।

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