September 29, 2026

जीबी पंत यूनिवर्सिटी में 3 से 6 अक्टूबर तक कृषि मेला, राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह होंगे मुख्य अतिथि,,,,,,,,

जीबी पंत यूनिवर्सिटी में 3 से 6 अक्टूबर तक कृषि मेला, राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह होंगे मुख्य अतिथि,,,,,,,,

पंतनगर उधमसिंहनगर। पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के. कश्यप ने बताया कि 3 से 6 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले 120वें अखिल भारतीय किसान मेले एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।

​इस वर्ष किसान मेले की थीम ‘स्मार्ट खेती, स्वस्थ धरती, समृद्ध किसान’ रखी गई है। मेले का उद्घाटन राज्यपाल करेंगे।

 🔵 3 से 6 अक्टूबर तक होगा आयोजन

​विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के. कश्यप ने बताया कि यह चार दिवसीय अखिल भारतीय किसान मेला 3 से 6 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा। मेले का औपचारिक शुभारंभ प्रदेश के राज्यपाल करेंगे।

​🔵 मेले की मुख्य थीम

​इस वर्ष किसान मेले की मुख्य विषय (थीम) ‘स्मार्ट खेती, स्वस्थ धरती, समृद्ध किसान’ तय किया गया है। मेले के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों और तकनीकों की जानकारी दी जाएगी।

🔵 किसान मेले के मुख्य आकर्षण और स्टॉल

  • ​उन्नत बीजों की बिक्री: मेले में गोविंद वल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GBPUAT) द्वारा विकसित रबी फसलों (जैसे गेहूं, सरसों, चना, मटर आदि) के उच्च गुणवत्ता वाले प्रामाणिक बीजों की बिक्री की जाएगी।
  • ​आधुनिक कृषि उपकरण प्रदर्शनी: देश-विदेश की प्रमुख कृषि कंपनियां ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, कल्टीवेटर, ड्रिप/स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली और कृषि ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों के लाइव डेमो और स्टॉल लगाएंगी।
  • ​फल एवं पौधशाला स्टॉल: फलदार पौधों की उत्तम कलम, जैविक खाद, कीटनाशक और बागवानी से जुड़े आधुनिक उपकरण किसानों को उचित दरों पर उपलब्ध कराए जाएंगे।

 🔵 ​पशुधन प्रदर्शनी और प्रतियोगिताएं

  • ​उन्नत पशु नस्लें: मेले के दौरान पशुधन प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी, जिसमें उन्नत नस्ल की गाय, भैंस, बकरी और मुर्गी पालन की तकनीकों को दर्शाया जाएगा।
  • ​पशु प्रतियोगिताएं: पशुपालकों के बीच सर्वश्रेष्ठ दूध उत्पादक और स्वस्थ पशुओं की प्रतियोगिताएं कराकर उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा।

​🔵 किसानों के लिए परामर्श और प्रशिक्षण

  • ​किसान-वैज्ञानिक संवाद: मेले में प्रतिदिन विचार-गोष्ठियों और सीधी चर्चा का आयोजन किया जाएगा, जहाँ किसान अपनी फसलों में लगने वाली बीमारियों, मृदा स्वास्थ्य और कीट नियंत्रण को लेकर कृषि वैज्ञानिकों से सीधी सलाह ले सकेंगे।
  • ​मृदा एवं जल परीक्षण: किसान अपने खेतों की मिट्टी और सिंचाई के पानी का सैंपल लाकर विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं में जाँच करवा सकेंगे।

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