September 15, 2026

विघ्नहर्ता का आगमन;” ढोल-नगाड़ों की थाप पर बप्पा का स्वागत, भक्ति के रंग में डूबा देश”

विघ्नहर्ता का आगमन;” ढोल-नगाड़ों की थाप पर बप्पा का स्वागत, भक्ति के रंग में डूबा देश”

🔴गणेश चतुर्थी: पर्व का महत्व, कथा एवं पूजन

​भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी या विनायक चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी पावन तिथि को भगवान श्री गणेश का प्राकट्य (जन्म) हुआ था। यह पर्व ज्ञान, बुद्धि, समृद्धि और सभी विघ्नों को दूर करने वाले ‘विघ्नहर्ता’ भगवान गणेश की उपासना का सबसे बड़ा उत्सव है।

​🔴महत्व और पौराणिक कथा

🔴​प्रथम पूज्य का दर्जा: माता पार्वती ने अपने उबटन (हल्दी-चंदन) से एक बालक की आकृति बनाकर उसमें प्राण फूंक दिए थे। जब भगवान शिव ने अज्ञानवश उनका शीश काट दिया, तो बाद में पार्वती जी के दुःखी होने पर गज (हाथी) का मस्तक लगाया गया। भगवान शिव ने उन्हें सभी देवताओं में ‘प्रथम पूज्य’ होने का वरदान दिया।

🔴​चंद्र दर्शन वर्जित: इस तिथि को चंद्रमा का दर्शन करना मना होता है, क्योंकि इसे ‘मिथ्या कलंक’ देने वाला माना जाता है। कथा के अनुसार, जब चंद्रमा ने श्री गणेश के रूप का उपहास उड़ाया था, तब गणेश जी ने उन्हें श्राप दिया था कि जो भी इस दिन चंद्रमा देखेगा, उस पर झूठा आरोप लगेगा।

​🔴पूजन और स्थापना विधि

🔴​प्राण प्रतिष्ठा: शुभ मुहूर्त (प्रायः मध्याह्न काल) में गणेश जी की नई (मिट्टी की) प्रतिमा घर या पंडाल में स्थापित की जाती है और ‘प्राण प्रतिष्ठा’ की जाती है।

🔴​प्रिय भोग व अर्पण: पूजा में गणेश जी को मुख्य रूप से दूर्वा (घास), मोदक, बेसन के लड्डू, लाल पुष्प और चंदन अर्पित किए जाते हैं।

🔴​मंत्र एवं आरती: “ॐ गं गणपतये नमः” और ‘गणेश अथर्वशीर्ष’ का पाठ करने के बाद आरती उतारी जाती है।

​🔴उत्सव और विसर्जन

​यह उत्सव 10 दिनों तक चलता है और अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा की प्रतिमा का जल में विसर्जन (गणपति विसर्जन) करके उन्हें विदाई दी जाती है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने इसे एक सार्वजनिक और सामुदायिक उत्सव का रूप दिया था, जिसने समाज को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई।

​आपको गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं! गणपति बप्पा मोरया,!

 

 

 

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