उत्तराखंड आजादी के 79 साल बाद दारमा घाटी के सीपू गांव पहुंची पहली गाड़ी, ग्रामीणों में खुशी की लहर,,,

धारचूला (पिथौरागढ़): चीन सीमा से सटी सीमांत दारमा घाटी के अंतिम और प्रथम गांव सीपू (ऊंचाई 11,820 फीट) के निवासियों का दशकों पुराना सपना आखिरकार सच हो गया।
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11,820 फीट की ऊंचाई पर बसे सीमांत गांव तक सड़क पहुंचने से 10 किमी की दुर्गम पैदल दूरी खत्म
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माइग्रेशन के दौरान पहली बार वाहन से धारचूला पहुंचे ग्रामीण, बुजुर्गों को मिली बड़ी राहत
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वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत 24 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा तिदांग-मारछा-सीपू मोटर मार्ग
आजादी के 79 साल बाद बीते 24 अक्टूबर को पहली बार गांव की दहलीज तक चार पहिया वाहन पहुंचा। सड़क सुविधा शुरू होने के साथ ही शीतकालीन प्रवास (माइग्रेशन) के तहत गांव के 8 से 10 परिवार पहली बार वाहन के जरिए सीधे धारचूला पहुंचे। गांव तक सड़क पहुंचने से स्थानीय बाशिंदों में खुशी का माहौल है।
बुजुर्गों को मिली राहत, सुरक्षित हुई आवाजाही

ग्राम प्रधान सरोजनी सीपाल ने बताया कि पहले ग्रामीणों को मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए 10 किलोमीटर की बेहद कठिन और जोखिम भरी पैदल दूरी तय करनी पड़ती थी। अब गांव सीधे सड़क नेटवर्क से जुड़ने के कारण ग्रामीणों, विशेषकर बीमारों और बुजुर्गों को भारी राहत मिली है। गांव के 85 वर्षीय पूर्व प्रधान सुंदर सिंह सीपाल, ज्ञान सिंह सीपाल, जीवन सीपाल और रेखा सीपाल ने इसे एक ऐतिहासिक पल बताते हुए कहा कि गांव में गाड़ी का पहुंचना किसी सपने के साकार होने जैसा है।
पर्यटन और सीमांत अर्थव्यवस्था को लगेंगे पंख

सड़क मार्ग खुलने से दारमा घाटी में साहसिक और धार्मिक पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव के प्रसिद्ध मूर्तिकार डीआर सीपाल द्वारा हाल ही में स्थापित राजुला-मालूशाही, सुनपति शौक्यानी और स्वामी विवेकानंद की मूर्तियों ने गांव के आकर्षण को और बढ़ा दिया है। सड़क बनने से अब बाहरी पर्यटक और श्रद्धालु महादेव गुफा, महादेव के पद चिह्न, मिलती बाई ताल, पार्वती ताल, छू मापांग ताल और आंचरी ताल जैसे नैसर्गिक व धार्मिक स्थलों तक सुगमता से पहुंच सकेंगे।
24 करोड़ से बन रहा 10 किमी लंबा मार्ग, 2027 तक लक्ष्य
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के अधिशासी अभियंता किशन सिंह ऐरी के अनुसार:
- योजना व लागत: केंद्र सरकार की ‘वाइब्रेंट विलेज योजना’ के तहत तिदांग-मारछा-सीपू तक 24 करोड़ रुपये की लागत से 10 किमी लंबी सड़क का निर्माण जुलाई 2024 से शुरू हुआ था।
- वर्तमान स्थिति: 24 अक्टूबर को सड़क को गांवों से फिलहाल अस्थाई रूप से जोड़ दिया गया है। संपूर्ण परियोजना को 2027 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है।
- पुलों का निर्माण: मार्ग पर पागल नाला (च्यो यांगती) पर 60 मीटर, धौली नदी पर 100 मीटर तथा सीपू और मारछा के बीच न्योला व लच्छर नदी पर 42-42 मीटर स्पान के स्टील मोटर पुल प्रस्तावित हैं। इनकी डीपीआर शासन को भेजी जा चुकी है, वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति मिलते ही निर्माण शुरू किया जाएगा।

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