September 18, 2026

उत्तराखंड में ऊर्जा उत्पादन की नई पहल, पिथौरागढ़ की रामगंगा और गोरीगंगा घाटियों में लगेंगी चार लघु जलविद्युत परियोजनाएं, लोगों को मिलेगा रोजगार,,,

उत्तराखंड में ऊर्जा उत्पादन की नई पहल, पिथौरागढ़ की रामगंगा और गोरीगंगा घाटियों में लगेंगी चार लघु जलविद्युत परियोजनाएं, लोगों को मिलेगा रोजगार,,,

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने पहाड़ की छोटी नदियों और जलधाराओं से बिजली उत्पादन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत सीमांत जिले पिथौरागढ़ की रामगंगा और गोरीगंगा घाटियों में एक साथ चार लघु जलविद्युत परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं, जिनकी कुल प्रस्तावित क्षमता 62 मेगावाट होगी।

​इन चारों नई परियोजनाओं के शुरू होने से राज्य की ऊर्जा उत्पादन क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। हैरानी की बात यह है कि इन चार नई परियोजनाओं की कुल क्षमता (62 मेगावाट), अकेले उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) की मौजूदा सभी लघु जलविद्युत परियोजनाओं की कुल क्षमता (68 मेगावाट) के लगभग बराबर है।

🟢 ​परियोजनाओं का विवरण और क्षमता

  • ईस्टर्न रामगंगा घाटी: इस घाटी में 15 मेगावाट क्षमता की मुवानी परियोजना और 14 मेगावाट क्षमता की कमतोली परियोजना प्रस्तावित है।
  • गोरीगंगा घाटी: इस क्षेत्र में 21 मेगावाट क्षमता की जिम्बा मरम और 12 मेगावाट क्षमता की प्यूंशानी परियोजना विकसित की जानी है।

🟢 निजी भागीदारी और बूट (BOOT) आधार पर निर्माण

​इन चारों परियोजनाओं को निजी विकासकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी से बूट (Build, Own, Operate and Transfer) आधार पर विकसित किया जाएगा। इसके तहत चयनित निजी भागीदार को डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करने से लेकर वित्तीय प्रबंधन, डिजाइन-इंजीनियरिंग, निर्माण कार्य और उसके संचालन एवं अनुरक्षण (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) तक की पूरी जिम्मेदारी निभानी होगी।

🟢 स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा

​अब तक उत्तराखंड में जलविद्युत विकास की मुख्य पहचान बड़े बांधों और बड़ी परियोजनाओं से रही है, लेकिन अब छोटी नदियों की क्षमता का दोहन करने के लिए 2 से 25 मेगावाट तक की परियोजनाओं की नीति पर जोर दिया जा रहा है।

​सीमांत जिले पिथौरागढ़ में इन योजनाओं के धरातल पर उतरने से न केवल बिजली उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि निर्माण गतिविधियों, स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसरों और क्षेत्र से जुड़ी अन्य आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की पूरी संभावना है।

🟢विशेष

 पिथौरागढ़ में छोटी जलविद्युत परियोजनाओं का यह पैकेज छोटी नदियों के माध्यम से राज्य में होने वाले बड़े ऊर्जा निवेश की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

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