October 11, 2026

उत्तरकाशी, 27 दिन बाद भी लापता ट्रेकर बबीता का नहीं मिला कोई सुराग, अब भालुओं की गुफाओं की और पहुंची खोजी टीम,,,,

उत्तरकाशी, 27 दिन बाद भी लापता ट्रेकर बबीता का नहीं मिला कोई सुराग, अब भालुओं की गुफाओं की और पहुंची खोजी टीम,,,,

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​उत्तरकाशी। रामनगर निवासी महिला ट्रेकर बबीता पांडेय 29 मई की रात को दयारा बुग्याल से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गई थीं। लगभग एक महीना बीत जाने के बाद भी उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

“एक महीने से जारी है उत्तराखंड का सबसे बड़ा सर्च ऑपरेशन”

पुलिस, SDRF, NDRF, ITBP और वन विभाग की संयुक्त टीमों द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान उत्तरकाशी जिले के हालिया वर्षों के सबसे बड़े सर्च ऑपरेशनों में से एक है। पहाड़, खाई और जंगलों को छानने के बाद भी खाली हाथ लौटना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

​🔴 जांच का बदला दायरा, वन्यजीव हमले की आशंका पर फोकस

​पारंपरिक रास्तों पर कोई सबूत न मिलने के कारण अब खोजी दल ने अपना दायरा बदल दिया है। वन विभाग के इनपुट के आधार पर दयारा बुग्याल और नटीण के जंगलों में उन दुर्गम क्षेत्रों, गुफाओं और गहरी ढलानों की तलाशी ली जा रही है, जहाँ भालुओं की सक्रियता या उनके ठिकाने होने की संभावना है। खोजी टीम वन्यजीव हमले, रास्ता भटकने और दुर्घटना सहित सभी मानवीय व प्राकृतिक पहलुओं की समानांतर जांच कर रही है।

​🔴 तकनीकी जांच की मांग और उठते गंभीर सवाल

​इतने बड़े पैमाने पर खोजबीन के बावजूद कोई ठोस सबूत न मिलने पर अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में अब केवल जमीनी खोज के बजाय डिजिटल फुटप्रिंट, कॉल रिकॉर्ड और लोकेशन डेटा जैसे तकनीकी विश्लेषणों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। इधर, बबीता के परिजनों की उम्मीदें अब भी कायम हैं और वे लगातार खोज जारी रखने की गुहार लगा रहे हैं। यह घटना उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में ट्रैकिंग सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की प्रभावशीलता पर भी बड़े सवाल खड़े करती है।

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