October 6, 2026

उत्तराखंड, कुमारी सैलजा की आपत्ति को दरकिनार कर मैदान में उतरे हरीश रावत, कुमाऊं में शक्ति प्रदर्शन से कांग्रेस की सियासत गरमाई,,,

उत्तराखंड, कुमारी सैलजा की आपत्ति को दरकिनार कर मैदान में उतरे हरीश रावत, कुमाऊं में शक्ति प्रदर्शन से कांग्रेस की सियासत गरमाई,,,

​हल्द्वानी/रामनगर/देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान के बीच पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा की आपत्ति को दरकिनार करते हुए कुमाऊं क्षेत्र में अपनी ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ शुरू कर दी है। जसपुर से शुरू हुई इस यात्रा में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह समेत कई दिग्गज कांग्रेसी विधायकों और पूर्व मंत्रियों ने एकजुटता दिखाकर शक्ति प्रदर्शन किया, जिससे राज्य का सियासी पारा चढ़ गया है।

​🟢 जगह-जगह जोरदार स्वागत, समर्थकों का दिखा भारी हुजूम

​हरीश रावत की यात्रा जसपुर, काशीपुर और रामनगर होते हुए देर रात हल्द्वानी पहुंची। पूरे रास्ते में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने फूल-मालाओं, आतिशबाजी और ढोल-नगाड़ों के साथ उनका भव्य स्वागत किया। रामनगर में कार्यकर्ताओं ने जेसीबी से पुष्पवर्षा कर उनका अभिनंदन किया। यात्रा के दौरान कालाढूंगी में आयोजित जनसंवाद में हरीश रावत ने कहा कि बीमारी के समय क्षेत्रवासियों से मिली दुआओं और आत्मीयता ने उन्हें नई ऊर्जा दी है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस राज्य की सत्ता में पूर्ण बहुमत के साथ वापसी करेगी।

​🟢 वरिष्ठ नेताओं का मिला खुला साथ

​पार्टी संगठन की अनिच्छा के बावजूद हरीश रावत की इस यात्रा में उत्तराखंड कांग्रेस के कई बड़े चेहरे साथ नजर आए। यात्रा में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व विधायक प्रीतम सिंह, पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा, विधायक हरीश धामी, आदेश चौहान, मनोज तिवारी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, पूर्व मंत्री तिलक राज बेहड़ और हेमेश खर्कवाल प्रमुख रूप से शामिल रहे।

​🟢 प्रभारी की आपत्ति पर बोले हरदा- “नेतृत्व का सम्मान करता हूं, पर यह व्यक्तिगत यात्रा”

​यात्रा को लेकर प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा द्वारा जारी की गई चिट्ठी और जताई गई आपत्ति के सवाल पर हरीश रावत ने सीधे विवाद में पड़ने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस के समर्पित सिपाही हैं और संगठन व शीर्ष नेतृत्व के निर्देशों का सम्मान करना उनका दायित्व है। उन्होंने स्पष्ट किया:

​”यह पार्टी का आधिकारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि गंभीर बीमारी से उबरने के बाद जनता और देवी-देवताओं का आभार व्यक्त करने के लिए निकाली गई एक व्यक्तिगत यात्रा है। मेरे हाथ में तिरंगा जरूर है, लेकिन मैं किसी भी तरह की गुटबाजी या बगावत से दूर रहकर केवल जनता का धन्यवाद करने निकला हूं। इससे पार्टी कहीं से भी कमजोर नहीं होगी। संगठन में रहकर आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया जा सकता।’

 

🔴 सैलजा बोली-  दिल्ली आकर स्पष्टीकरण दें हरदा

दूसरी तरफ, कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने इस मामले में कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के समानांतर कार्यक्रम चलाना अनुशासनहीनता के दायरे में आता है। सैलजा के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत 7 अक्टूबर को दिल्ली आकर अपना पक्ष रखेंगे और उनका स्पष्टीकरण सुनने के बाद ही पार्टी हाईकमान आगामी कदम पर विचार करेगा। वहीं, हरीश रावत का कहना है कि वे कुमाऊं का दौरा पूरा करने के बाद दिल्ली जाकर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा से मुलाकात करेंगे।

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