हरिद्वार सियासी रस्साकशी और प्रशासनिक अनदेखी की भेंट चढ़ी ‘नए हरिद्वार–रामदेव पुलिया’ छोटी गंगा सड़क, गड्ढों से जूझती जनता, बाल-बाल बची फिर मासूमों की जान- गौरव चक्रपाणी

हरिद्वार। धर्मनगरी में विकास के दावों और राजनीतिक श्रेय लेने की होड़ के बीच बुनियादी नागरिक सुविधाओं का दम घुट रहा है। शहर के व्यस्ततम संपर्कों में शामिल ‘नए हरिद्वार से रामदेव की पुलिया’ की ओर जाने वाला मुख्य मार्ग पिछले कई वर्षों से उपेक्षा का शिकार है। गहरे और जानलेवा गड्ढों में तब्दील हो चुका यह रास्ता अब हर दिन राहगीरों के लिए गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है।
रोज गुजरते हैं जिम्मेदार, फिर भी खामोश

हैरानी की बात यह है कि इस मार्ग से रोजाना आम नागरिकों के साथ-साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अमला और संबंधित निर्माण विभागों के अधिकारी गुजरते हैं। पार्षद से लेकर विधायक और मेयर तक- जिन पदों पर जनता ने सड़क, पानी और रोशनी जैसी बुनियादी जरूरतों के समाधान के लिए नुमाइंदों को बिठाया, वे सब इस दुर्दशा से वाकिफ होकर भी मौन साधे हुए हैं। ‘बजट की कमी’ या ‘तकनीकी अड़चनों’ का बहाना बनाकर इस मार्ग को वर्षों से भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।
विरोध प्रदर्शनों और ऐतिहासिक संदर्भों के बावजूद बेअसर
स्थानीय राजनीति में यह मार्ग पहले भी खासी चर्चा में रहा है। कांग्रेस नेता अशोक शर्मा ने ढोल-नगाड़ों और संबंधित विधायक की तस्वीरें लगाकर इस सड़क की मरम्मत के लिए अनोखे प्रदर्शन किए, लेकिन राजनीतिक खींचतान और आपसी मनमुटाव के चलते यह जनमुद्दा फाइलों और नारों के बीच ही उलझ कर रह गया।
उल्लेखनीय है कि इसी मार्ग के समीप पुलिया पार वह ऐतिहासिक परिसर भी स्थित है, जहां से कभी योग गुरु ने अपने शुरुआती सफर की नींव रखी थी। वर्तमान में यह आश्रम सभी आधुनिक सुविधाओं से संपन्न हो चुका है, किंतु विडंबना यह है कि आश्रम के बाहर की मुख्य सड़क आज भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है।
प्रत्यक्षदर्शी का अनुभव- टला बड़ा हादसा
मार्ग की दुर्दशा का भयावह रूप तब सामने आया जब एक दोपहर एक स्कूटी सवार अपने मासूम बच्चे के साथ पुलिया से ठीक पहले सड़क के गहरे गड्ढे का शिकार हो गया। संतुलन बिगड़ने से स्कूटी सीधे गड्ढे में जा गिरी। गनीमत रही कि पीछे से कोई भारी वाहन नहीं आ रहा था, जिससे पिता और बच्चे को गंभीर चोटें नहीं आईं और एक बड़ा हादसा टल गया। हालांकि, हर बार किस्मत साथ नहीं देती? आए दिन दोपहिया वाहन चालक यहां गिरकर चोटिल हो रहे हैं।
जनता का सवाल- किस बात की सजा?

स्थानीय निवासियों का कहना है कि राजनीति या नेताओं की आपसी खींचतान का खामियाजा टैक्स भरने वाली आम जनता क्यों भुगते? यदि समय रहते जिम्मेदार विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस सड़क का सुधारीकरण नहीं कराया, तो आने वाले दिनों में यह जानलेवा मार्ग किसी बड़े हादसे का गवाह बन सकता है। क्षेत्रवासियों ने चैनल के माध्यम से जिला प्रशासन से तत्काल संज्ञान ले इस जानलेवा समस्या के समाधान हेतु आग्रह किया।


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